गुरुवार, 13 मार्च 2014

पॉलिटिकल शायरी

सियासी दौर में अलग़ रंग हैं हुक्मरानों के
ख़ून के रंग को पान का दाग़ बताते हैं।

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तुमने टिकट न दिया तो छोड़ जायेंगे
सियासी पहलवान लड़ते हैं पाला बदल-बदल के।

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4 टिप्‍पणियां:

Tushar Raj Rastogi ने कहा…

आपको यह बताते हुए हर्ष हो रहा है के आपकी इस विशेष रचना को आदर प्रदान करने हेतु हमने इसे आज के ब्लॉग बुलेटिन - दोगला समाज पर स्थान दिया है | बहुत बहुत बधाई |

HARSHVARDHAN ने कहा…

लाजवाब रचना। सादर।।

नई कड़ियाँ : 25 साल का हुआ वर्ल्ड वाइड वेब (WWW)

HARSHVARDHAN ने कहा…

लाजवाब रचना। सादर।।

नई कड़ियाँ : 25 साल का हुआ वर्ल्ड वाइड वेब (WWW)

shahid ansari ने कहा…

dhanyavaad