मंगलवार, 10 मई 2011

कविता

तुम अपने दिल की बातें कभी तो कहते हो

मगर सिर्फ पूछने पर

खुद आकर नहीं कहते कि
तुम्हे पता है, आज ऐसा हुआ!

ऐसा कहने पे जो आँखों में चमक होती है
वो कहीं नहीं मिलती

जैसे कोई गहरी राज़ की बात
सुना रहे हो

पहले शायद तुम कहा करते थे

पर पहले तो तुम और भी बहुत कुछ किया करते थे 
जो अब नहीं करते 

तुमने बताया नहीं क्यों?

और हमने पूछा भी नहीं

क्योंकि आज कल तुम 
सिर्फ पूछने पे बताते हो
   

2 टिप्‍पणियां:

ana ने कहा…

bahut achchha likha hai aapne...abhar

Shahid Ansari ने कहा…

shukriya..!