मंगलवार, 1 जून 2010

कि कुछ कह दिया होता...!

मै आज अचानक उस से उसी मोड़ पे मिला
एक अरसे बाद

मुझे लगा वो मुझे पहचान रही थी

शायद वो कुछ बोले यही सोच रहा था मै और
वो भी शायद यही सोच रही थी

इसी इंतज़ार में दूरी कम होती गयी और वो
तिरछी नज़र से मुझे देखते हुए आगे बढ़ गयी

वापस आकर मै सोचता रहा
कि कुछ कह दिया होता

4 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

काफी सुन्दर शब्दों का प्रयोग किया है आपने अपनी कविताओ में सुन्दर अति सुन्दर

संजय भास्कर ने कहा…

किस खूबसूरती से लिखा है आपने। मुँह से वाह निकल गया पढते ही।

संजय भास्कर ने कहा…

सार्थक और बेहद खूबसूरत,प्रभावी,उम्दा रचना है..शुभकामनाएं।

Shahid Ansari ने कहा…

@sanjay shukriya ..!