शनिवार, 26 जून 2010

अजीब..

एक रात भरी ख़ामोशी से
कोई जाग गया बेहोशी से
थी बात कोई बेमानी सी
जो कह वो गया पुर्जोशी से

अलफ़ाज़ पलटता रह गया मै
कुछ समझ में मेरे आया ना
शायद आधी पूरी हो गयी थी
और आधी रही मदहोशी से

# शाहिद

1 टिप्पणी:

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया.