बह जाऊं तो दरिया हूँ
दिख जाऊं तो चेहरा हूँ
डूब जाऊं तो पत्थर हूँ
उभर आऊं तो मै क्या हूँ?
जो लिख जाऊं तो किस्मत हूँ
टूट जाऊं तो शीशा हूँ
बिखर जाऊं तो पत्ता हूँ
सिमट जाऊं तो कहाँ हूँ ?
दिख जाऊं तो चेहरा हूँ
डूब जाऊं तो पत्थर हूँ
उभर आऊं तो मै क्या हूँ?
जो लिख जाऊं तो किस्मत हूँ
टूट जाऊं तो शीशा हूँ
बिखर जाऊं तो पत्ता हूँ
सिमट जाऊं तो कहाँ हूँ ?
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