कुछ रूठ के जाना भी
अच्छा होता
गर मान भी जाते तो
अच्छा होता
हम बोल भी जाते
तो फिर क्या मतलब
वो सुन भी लेते तो
फिर क्या होता
बहुत तकलीफ भी दवा के
माफिक है
ज्यादा ख़ुशी मिलती तो
क्या बुरा होता
मुझे तो फ़िक्र है तुम्हारी
तुम्हे इस से क्या
तुम्हे बस इस से मतलब है
तुम्हारा क्या होगा
हर बार मुझे खुद से यही
कहना है पड़ता
जो मेरा है कभी तो वो
मेरा हुआ होता
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