शनिवार, 23 अप्रैल 2011

आखिर

ग़लत चीज़ें खींच लेती है अपनी ओर

क्योंकि उन्हें करने के लिए हिम्मत 
की दरकार होती है?
या वो बहुत आसान मालूम होती हैं?
 
या बस ऐसे 

कुछ सही करने में भी तो वक़्त लगता है

कितना कुछ चाहिए होता है
थोडा वक़्त और बहुत सारा ध्यान 

गौर करना पड़ता है बारीकियों पर

 लेकिन इस दरमयान 
पता ही नहीं चलता
कि आखिर हो क्या रहा है?

2 टिप्‍पणियां:

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

सुंदर विचार ... यही खेल है जीवन का....

Shahid Ansari ने कहा…

shukriya..!